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जुर्म रोकने में सहायक सी. आई. डी.

सीआईडी सोनी पर आने वाला एक अपराध व जासूसी पर आधारित भारत का सबसे लंबा चलने वाला धारावाहिक है।[1] २१ जनवरी १९९८ को इसका प्रसारण प्रारंभ हुआ। यह धारावाहिक तब से अब तक लगातार चल रहा है। इसने २१ जनवरी २०१५ को अपना सत्रह वर्ष पूर्ण कर अठारह वर्ष में आ गया।[2][3]इसने २७ सितम्बर २०१३ को अपना १००० कहानी पूरा करने में संपन्न हुआ।[4]इसके सर्जक, निर्देशक और लेखक बृजेन्द्र पाल सिंह हैं।[5][6] इसका निर्माण फायरवर्क्स नामक एक निर्माता कंपनी ने किया है। जिसके संस्थापक बृजेन्द्र पाल सिंह और प्रदीप उपूर हैं। शिवाजी साटमदयानन्द शेट्टीआदित्य श्रीवास्तव और दिनेश फड्निस इस धारावाहिक में सबसे लोकप्रिय किरदार निभा रहे है।[7]

कहानी[संपादित करें]

इसमें प्रति दिन के भिन्न-भिन्न कहानी दिखाया जाता है। इसमें सामान्यतः कोई भी प्रकरण को एक ही दिन में हल कर लिया जाता है और कुछ खास प्रकरण में इसे एक से अधिक दिनों तक ले जाया जाता है। इसमें हर बार एक नया प्रकरण दिखाया जाता है, परंतु इसकी मुख्य कहानी अलग है। जिसमें (शिवाजी साटम) एपीसी प्रद्युमन का किरदार निभा रहे है। जो अपने दायित्व के कारण अपने अपराधी बेटे नकुल (राहील आज़म) को गोली मार देते हैं। और (दयानन्द शेट्टी) वरिष्ठ निरीक्षक दया की भूमिका निभाते है, जिन्हे कई बार दरवाजा तोड़ते दिखाया गया है। (आदित्य श्रीवास्तव) वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत पहले-पहले अपराधी की भूमिका में दिखाई देते है और २६ प्रकरण के पश्चात वे वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत के किरदार में दिखते है, जो अपने पहले हुए सभी यादों को भूल चुके है और कहानी में कई बार यह अपनी पूरी यादाश्त खो चुके है। परंतु एक या दो प्रकरण के पश्चात ही उनकी बाद की यादाश्त वापस आ जाती है। इसमें (दिनेश फड्निस) उप निरीक्षक फ्रेडरिक्स जिसे सभी फ्रेडी भी बुलाते है, यह कहानी को हास्य से परिपूर्ण बनाते है। इसमें (नरेंद्र गुप्ता) डॉ॰ सालुंखे भी रहते है। इनके अलावा इस धारावाहिक के निर्माता, निर्देशक और कुछ भाग के लेखक बृजेन्द्र पाल सिंह कभी-कभी डीसीपी चित्रोले के किरदार में दिखते है। इनके अलावा सभी पात्र नए होते हैं।[8]

निर्माण[संपादित करें]

सीआईडी श्रृंखला के निर्माता बृजेन्द्र पाल सिंह ने १९७३ से १९८३ तक दूरदर्शन पर एक कैमरामैन के रूप में काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हे एक जासूसी धारावाहिक बनाने का विचार आया। उस समय इस प्रकार के जासूसी के धारावाहिक नहीं बनते थे और उनके पास इस प्रकार के धारावाहिक बनाने का कोई ज्ञान भी नहीं था। तब से उन्होंने इस धारावाहिक के अवधारणा पर काम करना शुरू किया। इस धारावाहिक के लिए उन्होने दूरदर्शन से पूछा था की क्या वे इस धारावाहिक को अपने चैनल में दिखाने में उनकी रुचि हैं या नहीं। लेकिन दूरदर्शन ने ऐसे धारावाहिक में कोई भी रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद वे सिर्फ चार दिन नामक एक फिल्म की तैयारी में लग गए। फिल्म के साथ-साथ वे अपने नए धारावाहिक की भी तैयारी में लगे हुए थे। इसी दौरान वे पुलिस की अपराध शाखा का दौरा करने के लिए भी गए। वहाँ वे केवल कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत की और उनके द्वारा हल किए गए मामलों और उनकी जासूसी की शैली के विषय में भी अच्छे से जाना। इसके बाद सिंह जी ने श्रीकांत सिंकर द्वारा लिखित जासूसी उपन्यास को भी पढ़ना शुरू किया। श्रीकांत सिंकर जी की लिखी हुई कहानी की शैली, उन्हे बहुत पसंद आई। इन सब से प्रेरित होकर उन्होंने एक जासूसी धारावाहिक श्रृंखला बनाने का कार्य शुरू कर दिया। सिंह जी ने इस धारावाहिक के प्रदर्शित होने के बारह वर्ष पूर्व और सोनी पर दिखने के आठ वर्ष पूर्व पहले से ही १९८६ में छह प्रकरण बना डाले। इस श्रृंखला को बनाने से पहले उन्होने किसी भी प्रकार का शोध या सर्वेक्षण नहीं किया। वे चाहते थे की इसकी कहानी पूरी तरह सरल रहे। इसके बाद वे इस धारावाहिक के लिए सोनी आदि चैनल से इसके दिखने के लिए पूछा, परंतु सोनी ने इस धारावाहिक में अधिक रुचि दिखाई और इस धारावाहिक को दिखाने के लिए मान गए। इसके बाद सिंह जी को केवल इस धारावाहिक को बनाने के लिए इसके पात्र और इसके बनाने का स्थान चुनना था।[9]

वे सबसे पहले हिन्दी और मराठी फिल्मों में कार्य कर चुके अभिनेता शिवाजी साटम को एसीपी प्रद्युमन के किरदार के लिए चुनते हैं। जो कि पहले ही सिंह जी के कई परियोजनाओं में कार्य कर चुके हैं। संजय शेट्टी जो सीआईडी के उत्पादन समूह के सदस्य है, ने दयानन्द शेट्टी को पात्र चुनाव के लिए चुना। सिंह जी शेट्टी से इतना प्रभावित हुए की पाँच मिनट में ही उन्हे चुन लिया। उनके चरित्र श्रृंखला लोगों में के बीच सबसे लोकप्रिय है। आशुतोष गोवरिकर जो वरिष्ठ निरीक्षक विरेन की भूमिका निभा रहे थे, उन्हे लगान फ़िल्म निर्देशन के कारण यह धारावाहिक छोड़ना पड़ा। इसके पश्चात आदित्य श्रीवास्तव को वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत का किरदार दिया गया, वे १९९८ में अपराधी की भूमिका में थे। तब वे राम गोपाल वर्मा की फिल्म सत्या में कार्य कर रहे थे। बाद में जब सिंह जी ने उनकी इस फ़िल्म में उनका अनुभव देखा तो वह उन्हे सीआईडी में अभिनय के लिए कहा। लेकिन वे केवल २६ प्रकरणों हेतु सीआईडी में किरदार निभाने के लिए सहमत हुए और अभी भी सीआईडी में कार्य कर रहे है। यह धारावाहिक २३ जुलाई १९९९ में दिखाया गया था। जब वह पहली बार वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत के पात्र में थे। पात्र चुनाव के दौरान ही अन्य किरदारों को भी चुना गया। परंतु अन्य सभी किरदार बदलते रहते है।[10]

स्थान[संपादित करें]

यह मुख्य रूप से व बहुत लंबे समय से मुंबई में ही इसे बनाया गया है। इसके साथ-साथ अनेक भाग भारत के कई स्थानो पर भी बनाए गए है। जैसेदिल्लीजयपुरकोलकातामनालीचेन्नईशिमलाजोधपुरजैसलमेरगोवापुणेऔरंगाबादकोल्हापुरहिमाचल प्रदेशकेरल और कोच्चि के कई स्थान।[11][12] इसके अलावा कुछ भाग विदेशों में भी बनाया गया है। सीआईडी की आखिरी चुनौती नामक एक छोटी श्रृंखला में महेश मांजरेकर के साथ, (जो इस भाग में एक हरगिज़ डोंगारा नामक अपराधी की भूमिका में थे) लंदन में ही बनाया गया था। २००४ में ‘सीआईडी’ के तीन प्रकरण का निर्माण इंग्लैंड में हुआ और २०१० में ८ प्रकरणों का निर्माण स्विटजरलैंड और पेरिस में हुआ था।[13]

प्रसारण[संपादित करें]

२१ जनवरी १९९८ को पहली बार इसका प्रसारण सोनी में हुआ। इस धारावाहिक के २६ प्रकरण होने के पश्चात आदित्य श्रीवास्तव को एक नए किरदार वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत दिया गया। इसके पश्चात यह अब तक चल रहा है। यह सबसे पहले बुधवार को रात ९:३० बजे देता था। इसके बाद इसे केवल शुक्रवार को रात १० बजे कर दिया गया।[14] इसके बाद २१ मई २०१० को इसे रात १० बजे कर दिया गया। तब यह १ घंटे के लिए शुक्रवार से शनिवार देता था।[15] ३ फरवरी २०१३ से यह शुक्रवार, शनिवार और रविवार को भी देने लगा।[16]

इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसे अन्य भारतीय भाषा में अनुवादित किया गया है। इसका तेलुगू संस्करण मां टीवी में और तमिल संस्करण ज़ी तमिल में प्रसारित हो रहा है। इसके अलावा बंगाली में इसका भिन्न श्रृंखला निकाला गया है।[17][18] इसे दिसम्बर २००४ में अत्यधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिला और यह ३.७ मूल्यांकन प्राप्त कर पूरे भारत में पहली बार २९वें स्थान पर रहा।[19] टीएएम अनुसंधान के अनुसार इसे सितम्बर २०१० में ५.१७ का उच्चतम मूल्यांकन मिला, जो इसके पिछले कुछ वर्षों का सबसे अधिक मूल्यांकन हैं।[20] वर्तमान में इस धारावाहिक को ४.१ के आसपास का मूल्यांकन मिल रहा है।[21][22]

कलाकार

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